love and peace

 

नफरत से सिचा है तुमने खुद को
 
प्रेम की बीज लगा कर के देखो
कभी दिलो को दिलो से मिला कर के देखो I
 
नफरत की आग में बिखरी दुनिया को

प्रेम की धागे से मिला कर के देखो
कभी प्रेम की धरा बहा कर के देखो I
 
ईर्ष्या के अंधकार को छोड़

सूरज सा प्रकाश फैला कर के देखो
कभी दिलो को दिलो से मिला कर के देखो I

 
मत बाटो वतन को भेदभाव की आग में

गले से गले को मिला कर के देखो
कभी प्रेम की धरा बहा कर के देखो I

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By ANISH SINGH

IT Analyst at Tata Consultancy Services. Follow @aniluvall

5 thoughts on “दिलो को दिलो से मिला कर के देखो–हिंदी कविता”

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